Free Hindi Book 11 Kadam Ek Sath In Pdf Download
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पुस्तक का संक्षिप्त विवरण:
एक-एक साँस जोड़कर बनी इस जिन्दगी का ताना-बाना न जाने कितने ही छोटे-छोटे से मामूली से नज़र आने वाले पलछिनों को मिलाकर बुना जाता है। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि जब हम अपनी जिंदगी की एल्बम को पलटकर देखते हैं, तो हमारे अब तक के सफ़र की तस्वीरें हमें ही हैरान कर जाती हैं। किसी ने सच ही कहा है कि हर इंसान की जिंदगी में एक ऐसा मौक़ा जरूर आता है, जिसमें उसके जीवन की दिशा और दशा दोनों को तय करने की ताकत होती है। अक्सर लोग नादानी के चलते इस मौके को गंवा देते हैं, और कभी-कभी तो सबकुछ जानते-समझते हुए भी वह कोशिश करने की जहमत ही नहीं उठाना चाहते। स्कूल के दिनों में आपने टीचर को कहते सुना होगा की सेब तो हमेशा से ही पेड़ से नीचे गिरते आ रहे थे, मगर गुरुत्वाकर्षण के बारे में सिर्फ न्यूटन ही सोच पाए। दरअसल किसी सामान्य सी दिखने वाली बात को परखने और समझने का नज़रिया ही उससे जुड़े व्यक्ति और उस घटना को खास बना देता है।
श्रीमती विभा चुघ भी आज जिंदगी के बायोस्कोप में पुरानी रीलों को रिवाइंड करके देख पा रही थीं। सामने आता हर एक फ्रेम कभी उनके चेहरे पर मुस्कराहट बनकर खिल उठता तो कभी खुशी के आँसू उनकी आँखों में झिलमिला उठते! मौक़ा ही कुछ ऐसा था... उनके जीवन पर लिखी गई किताब का लॉन्च होना जो तय हुआ था! प्रकाशक ने उनसे कुछ तस्वीरों की माँग की थी, इसी सिलसिले में पुरानी ड्राइव्स को खंगालते हुए विभा जी एक बार फिर से उन पलों से रू-ब-रू हो पा रहीं थी जहाँ से एक-एक कदम बढ़ाते हुए उन्होंने अब तक का अपना यह मुकाम हासिल किया था। आज वह खुद को और भी बेहतर ढंग से समझ पा रही थीं... आखिर क्या है उनकी पहचान?
करनाल के एक छोटे से कस्बे में जन्मी विभा का बचपन बिल्कुल वैसा ही था जैसे डिजिटलाइजेशन का दौर आने के पहले पैदा हुई पीढ़ी ने जिया है। उनके घर में माता-पिता के साथ-साथ उनकी दादी माँ, एक बड़ी बहन और एक छोटा भाई रहते थे। उनकी दादी काफी धार्मिक स्वभाव बाली महिला थीं, और माँ के कामकाजी होने की वजह से विभा के बचपन का अधिकतर हिस्सा दादी माँ की छत्रछाया में गुजरा है। ऑफिस की व्यस्तता के चलते उनकी माँ ने भाभा जी को बच्ची की देखभाल में परिवार के सदस्यों की मदद करने के लिए नियुक्त किया था। दादी माँ की तरह ही भाभा जी का हृदय भी दया, करुणा और भक्तिभाव से भरा हुआ था। वह विभा को रोज अपने साथ गुरुद्वारा लेकर जाया करती थीं। खाना बनाते हुए वह रोजाना पहली रोटी गाय के लिए और आखिरी रोटी कुत्ते के लिए रखा करती थीं। इस तरह पशु-प्रेम का पहला पाठ विभा ने भाभा जी से उस नन्हीं सी उम्र में ही सीख लिया था। हालाँकि जैसा कि आमतौर पर घरों में होता है, विभा को भी बचपन में कुत्तों से डरना ही सिखाया गया था। घर में और कोई पशु-प्रेमी न होने के कारण कुत्ते के काटने पर चौदह इंजेक्शन लगने का खौफ उनके मन में भी बहुत गहरे तक बैठ चुका था।
Details of Book :-
Particulars | Details (Size, Writer, Dialect, Pages) |
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Name of Book: | 11 कदम एक साथ | 11 Kadam Ek Sath |
Author: | Sara Verma |
Total pages: | 45 |
Language: | हिंदी | Hindi |
Size: | 1.5 ~ MB |
Download Status: | Available |

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