Free Hindi Book Aantarik Kayakalp Ka Saral Kintu Sunishchit Vidhan In Pdf Download
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पुस्तक का संक्षिप्त विवरण:
भौतिक क्षेत्र की सफलताएँ योग्यता, पुरुषार्थ एवं साधनों पर निर्भर हैं। आमतौर से परिस्थितियाँ तदनुरूप ही बनती हैं। अपवाद तो कभी-कभी ही होते हैं। बिना योग्यता, बिना पुरुषार्थ एवं बिना साधनों के भी किसी को कारूँ क्रा गड़ा खजाना हाथ लग जाय, छप्पर फाड़कर नरसी के आँगन में हुण्डी बरसने लगे तो इसे कोई नियम नहीं, चमत्कार ही कहा जायगा। वैसी आशा लगाकर बैठे रहने वाले, सफलताओं का मूल्य चुकाने की आवश्यकता न समझने वाले व्यवहार जगत में सनकी माने और उपहासास्पद समझे जाते हैं। नियति-विधान का उल्लंघन करके, उचित मूल्य पर उचित वस्तुएँ खरीदने की परम्परा को झुठलाने वाली पगडण्डियाँ ढूँढ़ने वाले पाने के स्थान पर खोते ही खोते रहते हैं। लम्बा मार्ग चलकर लक्ष्य तक पहुँचने की तैयारी करना ही बुद्धिमत्ता है, यथार्थवादिता इसी में है। बिना पंखों के कंल्पना लोक में उड़ान उड़ने वाले बहिरंग जीवन में, व्यवहार क्षेत्र में कदाचित् कभी कोई सफल हुए हों।
अध्यात्म क्षेत्र सूक्ष्म, अदृश्य, अविज्ञात जैसा लगता भर है। वस्तुतः वह भी अपने स्थान पर भौतिक जगत की तरह सुस्थिर और सुव्यवस्थित है। आँखों से न दीख पड़ने पर भी उसकी सत्ता सन्देह से परे है। शरीर दीखता है, प्राण नहीं। प्राण की नापतौल न तो इन्द्रिय शक्ति से हो सकती है और न किसी यंत्र उपकरण से, फिर भी उसकी सत्ता से इन्कार नहीं किया जा सकता। मरणोत्तर जीवन का अस्तित्व भी ऐसा ही है, जिसका यांत्रिक पर्यवेक्षण नहीं हो सकता। इतने पर भी वह पुरातन की तरह आधुनिक निर्धारणों से ही अपने अस्तित्व का परिचय देता है। विचारों की इच्छा-शक्ति, साहस आदि अदृश्य प्रसंगों की विशिष्टता एवं परिणति से कोई इन्कार नहीं कर सकता। यह अदृश्य जगत के अनेकानेक प्रमाणों में से कुछ है। यह क्षेत्र अव्यवस्थित नहीं है। अणुओं और तरंगों से विनिर्मित पदार्थ जगत् की तरह ही उसका भी सुनिश्चित और व्यापक अस्तित्व है, उसकी भी गति विधियाँ चलती और प्रतिक्रियाएँ होती हैं।
अस्तु उसके भी अपने सुनिश्चित नियम, विधान और अनुशासन होने का तथ्य भी स्वीकारना होगा। अन्धेरवर्दी, अराजकता, मनमानी अदृश्य जगत में भी न चलती है और न टिकती ठहरती है। अतः अदृश्य जगत् के सम्बन्ध में भी यह नहीं सोचा जाना चाहिए कि वहाँ किसी नियम-अनुबन्ध की आशा नहीं है। 'अँधेर नगरी बेबूझ राजा' की युक्ति सुनी तो जाती है, पर देखी कहीं नहीं गई। हर क्षेत्र के अपने-अपने नियम्, विधान, अनुशासन है। अध्यात्म क्षेत्र भी उसका अपवाद नहीं हो सकता । सृष्टा की इस समूची कृति में कहीं भी अव्यवस्था नहीं है। यहाँ तक कि भूकम्प-तूफान जैसी अप्रत्याशित यदा-कदा होने वाली घटनाएँ भी प्रकृति के सुनिश्चित नियमों के अन्तर्गत ही होती हैं, भले ही उन्हें हम अभी पूरी तरह न समझ पाये हों ।
Details of Book :-
Particulars | Details (Size, Writer, Dialect, Pages) |
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Name of Book: | अनंतिक कायाकल्प का सरल परंतु सुनिश्चित विधान | Aantarik Kayakalp Ka Saral Kintu Sunishchit Vidhan |
Author: | Pt. Sriram Sharma Acharya |
Total pages: | 173 |
Language: | हिंदी | Hindi |
Size: | 5.5 ~ MB |
Download Status: | Available |

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