आयुर्वेद का बृहत इतिहास | AYURVED KA BRIHAT ITIHAS HINDI BOOK PDF DOWNLOAD

Ayurved Ka Brihat Itihas Hindi Book

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पुस्तक का संक्षिप्त विवरण:

किसी भी वस्तु का इतिहास उसके भूतकाल का वर्णन करता है (इति+ह+ आस - ऐसा निश्चय से था) वत्र्तमान अयवा भविष्य का नहीं। इतिहास में बीती हुई सच्ची घटनाओं का उल्लेख रहता है। इन घटनाओं का उल्लेख भी कम महत्त्व का नहीं है, क्योंकि भविष्य या वर्तमान इन्हीं स्वीकृत तथ्यों के आधार पर टिके होते हैं। इन घटनाओं को सही और सच्चे रूप में टीपना ही सच्चे इतिहासज्ञ का काम है। इसके लिए प्रमाण-सामग्री को घटाना-बढ़ाना अथवा मनमाना सुधार करना इतिहासज्ञ के लिए सम्भव नहीं। घटनाओं या सामग्री से जो निष्कर्ष सीधे और सरल रूप में प्रतिविम्वित होता हो उसे ठीक उसी रूप में स्वीकार करके उपस्थित करना ही सच्चे इतिहासज्ञ का कर्तव्य है। इतिहासज्ञ घटनाओं और सामग्री के साथ सत्य-परायणता बरतता है। उसके लिए प्रसिद्ध टीकाकार मल्लिनाथ का वाक्य "नामूलं लिख्यते किञ्चिन् नानपेक्षितमुच्यते", एक सम्बल या प्रकाशस्तम्भ रहना चाहिए। इतिहास की सामग्री लोहे के दूढ़ साँचे में ऐसी कसी होती है कि इसमें जरा भी रद्दोबदल नहीं किया जा सकता ।

कई बार एक ही सामग्री से भिन्न-भिन्न इतिहासज्ञ अपने-अपने व्यक्तिगत दृष्टि-कोण से पृथक् पृथक् निष्कर्ष निकालते हैं। ऐसी अवस्था में इतिहासज्ञ का कर्तव्य होता है कि वह वैज्ञानिक तत्त्वालोचक वृद्धि का सहारा लेकर निष्पक्ष रूप में विज्ञ न्यायाधीश की भाँति परस्पर विरोधी साक्षी और लेखन में सचाई की थाह पाने का प्रयत्न करे। अपने निष्कर्ष पर पूर्व-कल्पित मतों का तथा व्यक्तिगत पक्षपात का प्रभाव नहीं आने देना चाहिए। प्रमाणों की साक्षी से जो परिणाम निकले उसी, को अपरिहार्य जानकर स्वीकार करना चाहिए और घटनाओं के आधार से भूतकाल का जो रूप सड़ा हो उसे सिर-माथे पर रखना चाहिए। यह चित्र उसकी रुचि के. अनुकूल हो या न हो, उसे अच्छा लगे या बुरा, उसके जातीय गर्व को उससे सन्तोष मिले या ठेस लगे, हर अवस्था में वह जैसा है, वैसा ही उसे लिखना चाहिए।

Details of Book :-

Particulars

Details (Size, Writer, Dialect, Pages)

Name of Book:आयुर्वेद का बृहत इतिहास | Ayurved Ka Brihat Itihas
Author:Uttar pradesh Hindi Sansthan
Total pages:734
Language: हिंदी | Hindi
Size:268 ~ MB
Download Status:Available


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