Free Hindi Book Gayatri Panchdashi In Pdf Download
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पुस्तक का संक्षिप्त विवरण:
हमारे शास्त्रों में गायत्री का महत्त्व काफी वर्णित है। इस ग्रन्थ का उद्देश्य उनकी पुनरुक्ति नहीं है। गायत्री एक छन्द है, तथा उस रूप में उसे सर्व प्रमुख कहा गया है-गीता में भगवान् कृष्ण ने छन्दों में अपने को गायत्री कहा है। इस छन्द में वेद के अधिकांश सूक्त हैं। उन्हीं में एक सूक्त गायत्री मन्त्र कहा जाता है। इसके साथ ॐ तथा ३ या ७ व्याहृतियों का भी प्रयोग होता है। यह गायत्री मन्त्र ही वेद माता कहा गया है। अथर्व वेद (१९/७१) में एक स्वतन्त्र सूक्त को ही वेदमाता कहा जाता है। किन्तु महर्षि दैवरात ने वाङ्माता रूप में ऋक् (१०/११४/४) को माना है। इस रूप में सृष्टि तथा शब्द रूप में वेद की उत्त्पत्ति कैसे होती है, इसकी व्याख्या कहीं नहीं है। सृष्टि का आरम्भ विन्दु, ओड्ङ्कार, व्याहृति, तथा गायत्री पादों के द्वारा कैसे होती है, इसकी व्याख्या करने की चेष्टा की गयी है।
प्रख्यात वेदज्ञ तथा तान्त्रिक श्री भास्करराय भारती ने वरिवस्या रहस्य में मन्त्रोंके १५ अर्थ कहे हैं। यही अर्थ वेद में भी कहा गया है। वेद के मुख्यतः ३ अर्थ माने जाते है-आध्यात्मिक, आधिदैविक, तथा आधिभौतिक। यह विश्वों के ३ विभाजन पर आधारित है-शरीर के भीतर का, आकाश में, तथा हमारे निकट की पृथ्वी का। आकाश में निर्माण के ५ चरण थे, जिनके अनुरूप यज्ञों का ५ प्रकार का विभाजन कई रूपों में होता है। इसके अनुसार सिख मत में ३ विश्व-सत्-श्री-अकाल, तथा ५ क्रियाओं के प्रतीक ५ ककार हैं। इनके द्वारा २ प्रकार के विभाजन का रहस्य स्पष्ट हुआ। दोनों प्रकार मिलाने पर १५ प्रकार के अर्थ वेद मन्त्रों के हैं। इन १५ जयों की व्याख्या वरिवस्या रहस्य में है। इन अर्थों के अनुरूप अर्थ करना सम्भव नहीं लगा। अतः ब्रह्म के प्रतीक के रूप में जिन देवताओं की पूजा की जाती है, उन सभी का निर्देश एक ही गायत्री मन्त्र से कैसे होता है, इसकी व्याख्या की गयी है। यह सभी देवताओं के एकत्व के रूप में समझाया गया है। ब्रह्म एक ही है, पर उसे कई रूपों में देखा जाता है। कुरान में भी अल्लाह के १००, १०३, या १०८ नाम हैं। इनके अलग अलग अर्थ हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि अल्लाह कई हैं, पर एक ही को कई रूपों में देखा जाता है।
Details of Book :-
Particulars | Details (Size, Writer, Dialect, Pages) |
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Name of Book: | गायत्री पंचदशी | Gayatri Panchdashi |
Author: | Arunkumar Upadhyaya |
Total pages: | 134 |
Language: | हिंदी | Hindi |
Size: | 31 ~ MB |
Download Status: | Available |

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