खुल कर खाओ फिर भी वजन घटाओ | KHUL KAR KHAO FIR BHI VAJAN GHATAO HINDI BOOK PDF DOWNLOAD

Khul Kar Khao Fir Bhi Vajan Ghatao Hindi Book

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पुस्तक का संक्षिप्त विवरण:

जनवरी माह की एक सुबह, ठंडी धूप में एथलीटों ने पूरी सड़क को ढ़क लिया। दौड़ का अन्त क़रीब ही दिख रहा था। एक बहुत बड़ा जनसैलाब (मेला) एथलीटों को प्रोत्साहित कर रहा था, जो मुम्बई मैराथन की वार्षिक दौड़ में शामिल होने के लिए इकट्ठे हुए थे। डॉक्टर, वकील, कम्पनियों के अधिकारी, गृहणियां और छात्र सभी अपने जीवन की सबसे बड़ी शारीरिक परीक्षा में भाग लेने के लिए वहां जुटे थे।

कुछ लोगों के लिए यह उस यात्रा का अन्त था, जो उस दौड़ के दिन से महीनों या वर्षों पहले आरंभ हुई थी। कुछ लोग बहुत छोटे कस्बों से आए थे, जहां प्रशिक्षण की बहुत सीमित सुविधाएं उपलब्ध थीं। कुछ लोग बीमारियों से जूझ रहे थे। उनकी प्रेरणा का कारण कुछ भी हो, चाहे वह किसी सीमा में अपने शरीर को झोंक देने की खुशी है या इस जीवन को लक्ष्य को पा लेने की संतुष्टि, सबमें एक चीज़ समान थी। वे पीछे मुड़कर नहीं देख रहे थे कि उनके पीछे कौन आ रहा है। वे आगे भी नहीं देख रहे थे कि कौन उनसे आगे निकल चुका है। वे सिर्फ़ आगे बढ़ रहे थे। लेकिन लाल, टिमटिमाते अंकों वाली घड़ी की ओर नहीं देख रहे थे। जैसे ही उन्होंने सफलता और असफलता के बीच की सीमा फिनिश-लाइन को पार किया, उनका ध्यान छह बड़े-बड़े अक्षरों की ओर गया।

'स-मा-प-न रे-खा'

उन्होंने वह करिश्मा कर दिखाया था। उन्होंने दौड़ पूरी कर ली थी।

यह उनकी जीत थी।

हमारे बचपन में हमें सिखाया जाता था कि दौड़ जीतने के लिए ही होती है। इसका अर्थ सिर्फ़ प्रथम आना है क्योंकि दूसरे स्थान पर रहने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। हमें यह नहीं सिखाया गया कि दौड़ पूरी कर लेना या अपनी योजना पर टिके रहना भी अपने आप में एक पुरस्कार है।

इसी तरह, लम्बे समय से स्थायी रूप से वज़न घटाना कोई तेज़ दौड़ लगाना नहीं है। इसे जीते जाने की ज़रूरत नहीं होती। मैराथन दौड़ के समान ही यह तो सिर्फ़ धैर्य की एक यात्रा है। इनमें अंतर केवल यही है कि वज़न कम करने की आपकी यात्रा आपके वांछित लक्ष्य तक जाती है, जिसकी गति आपका शरीर तय करता है। आपका कार्य केवल समापन-रेखा तक पहुंचना है।

मैंने यह पुस्तक लिखने का फैसला इसलिए किया क्योंकि मैं उन लोगों के प्रति बहुत चिन्ता महसूस करती हूं, जो अपने शरीर पर बहुत ज़्यादा समय ख़राब करते हैं। हम अपनी शादी, अपने साथी से पुनर्मिलन, किसी कॉन्फ्रेंस या किसी शुभ अवसर पर सुन्दर दिखने के लिए इतनी जल्दी में होते हैं कि हम पौष्टिक आहार लेने की बात याद ही नहीं रखते और अपने-आप को तनावग्रस्त कर लेते

हैं जिससे हमारा वज़न पुनः बढ़ने लगता है। हम अपने शरीर को उसकी अंतिम सीमा तक धकेल देते हैं।

लेकिन जब समय बीतता है, तो अकसर हमारे शरीर को हानि होती है। क्योंकि समय अचानक ही हमारी पाचन प्रणाली, हमारे हृदय, मस्तिष्क, रक्त-प्रवाह, श्वसन क्रिया और ऊर्जा के स्तर से ज़्यादा महत्त्वपूर्ण हो जाता है।

Details of Book :-

Particulars

Details (Size, Writer, Dialect, Pages)

Name of Book:खुल कर खाओ फिर भी वजन घटाओ | Khul Kar Khao Fir Bhi Vajan Ghatao
Author:Pooja Makhija
Total pages:246
Language: हिंदी | Hindi
Size:20 ~ MB
Download Status:Available


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