Free Hindi Book Mano Vaigyanika Sanjivani In Pdf Download
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पुस्तक का संक्षिप्त विवरण:
आधुनिक काल में मनोविज्ञान के क्षेत्र में बड़े महत्य की खोचें हुई है। उन सोबों का साधाख्य उद्देश्य लौकिक जीवन में सफलता प्राप्त करना मात्र रहा है। मनुष्य की बुद्धि और मोग्यता की माप फरना, किसी विशेर प्रकार के मानसिक रोग की चिकित्सा करना, और कुशल सामाजिक या राजनीतिक चनना, यही साधारण मनोवैज्ञानिक अध्ययन का प्रयोजन रहता है; परन्तु मनोनिशान का उद्देश्य आत्म-विजय प्राप्त करके शाश्वत शान्ति प्राप्त करना भी हो सकता है। मनोविज्ञान का इस प्रकार सदुपयोग भारत वर्ष के प्राचीन ऋषियों ने किया था। भगवान बुद्ध और महर्षि पातंजलि ने ऐसे मनोविज्ञान की रचना की थी जिनके ज्ञान से और जिनमें बतलाये साधारण अभ्यास से मनुष्य न केवल स्थाई मानसिक और शारीरिक रोगों से मुक्त हो सकता है बरन् भव रोग से भी मुक हो जाता है। मनो-वैज्ञानिक संजीवनी का उद्देश्य इस प्रकार की खोबों को प्रकाश में लाना है। विदेश के कुछ विद्वान भी मनोचिशान का सर्वोत्तम उद्देश्य आत्म-निर्माण मानने लगे है। इनके विचारों को भी बनता के समक्ष रखना आवश्यक है।
भगवान बुद्ध और पातंजलि की योग की साघनाथों को व्यवहार मैं लाने से अनेक प्रकार के मानसिक क्लेश दूर हो जाते हैं और संसार के सामान्य पुरुष ऐसे रोगों से बचे रह सकते हैं वो अन्यथा उन्हें हो जाते हैं। फाशी मनोविज्ञान शाला में इन साधनाओं संबंधी अनेक प्रयोग किये गये हैं। ये प्रयोग डा० फ्रायड, चार्ल्सयु'ग और डा० विलियमनाउन की विचार प्रणाली से मी लाभउड़ाकर सफल बनाये गये हैं; परन्तु इनका मूल-तत्व भारतीय दर्शनों से लिया हुआ है। आनापान सति के अभ्यास के द्वारा मनुष्य स्वगत सम्मोहन की अवस्था में आ सकता है, वह जितनी देर चाहे उतनी देर के लिये अपने को मानसिक और शारीरिक पीड़ाओं से मुक्त कर सकता है तथा आनापानसति द्वारा प्रात योग मुद्रा में यह अपने मन में जिस विचार को इढ़ता से बैठाना चाहता है बैठा सकता है। आनापानसति शुभ श्रात्म-निर्देश देने का सर्वोत्तम उपाय है। अनापानसति से सैकड़ों प्रकार के रोग रोगी का चिना मनोविलक्षण किये अच्छे हो सकते हैं। इन बातों की सत्यता काशी मनोविज्ञान शाला की मानसिक चिकित्सा में प्रमाणित हुई है। आनापानसति के द्वारा हमने भूत का भय, अकारया चिन्ता और मम, अनेक प्रकार की शारीरिक पीड़ाये, सिर और पेट की पीड़ा, हृदय की धड़कन आदि अच्छे किये हैं। भगवान बुद्ध का कहना है कि आनापान सति के द्वारा मनुष्य निर्वाण तक की प्राप्ति फर संकता है। अतएव अनेक प्रकार के शारीरिक व मानसिक रोगों का इसके द्वारा अच्छा हो चाना एक साधारण सी बात है। हमने को प्रयोग इस अभ्यास के अब तक किये हैं उन्हीं के निष्कयों को इस लेख संग्रह में किया है। डा० विलियमब्राउन ने थानापानसति के जैसे ही अभ्यास द्वारा अनेक प्रकार के मानसिक रोगियों की चिकित्सा पिछली लड़ाई के समय की थी। वे इसका उपयोग अनेक प्रकार के मानसिक व्याधि के ग्रस्त रोगी के लिये करते हैं।
Details of Book :-
Particulars | Details (Size, Writer, Dialect, Pages) |
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Name of Book: | मनो वैज्ञानिक संजीवनी | Mano Vaigyanika Sanjivani |
Author: | Laljiram Shukla |
Total pages: | 138 |
Language: | हिंदी | Hindi |
Size: | 106 ~ MB |
Download Status: | Available |

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