Free Hindi Book Sambhala In Pdf Download
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पुस्तक का संक्षिप्त विवरण:
उसकी आंख खुली तो उसने आप को एक सुनसान निर्जन स्थान पर पाया, घने अंधेरे में वो जगह काफी भयानक लग रही थी.. चांद की रौशनी में बस थोड़ा बहुत ही नज़र आ रहा था और उतनी रौशनी में उसने देखा कि वो एक शमशान में चित पड़ा है, एक ऐसे शमशान में जिसकी अधिकांश चिताएं जल कर ठंडी होनी शुरू हो गई थीं सिवाय दूर एक चिता के... जो कि अब भी बुझते बुझते एकाएक बीच बीच में भड़क उठती थी जैसे किसी पर अपना क्रोध निकाल रही हो।
वो आश्चर्य और डर से आंखे फाड़े कभी उस जगह को देखता तो कभी उन बुझती चिताओं को... उसकी समझ में कुछ भी तो नहीं आ पा रहा था.. इसी कारण उसने कई बार अपनी आंखों को मसल कर खोला लेकिन हर बार उसे वही भयानक मंज़र नजर आता। वो समझ नहीं पा रहा था कि आख़िर वो यहाँ कैसे आ गया... वो तो अच्छा भला शादी वाले घर मे था, उसके छोटे भाई की शादी हुई थी और वे सब नई ब्याहता को विदा करवा कर आज दिन में ही तो लाये थे, दिन भर हवेली में शादी के बाद कि रस्में और हंसी ठिठोली होती रही थीं और रात में अधिकांश मेहमानों को विदा करके वो थक कर चूर हो कर अपने पलँग पर बेसुध हो कर गिर पड़ा था... पत्नी ने कहा भी था कि कुछ खा कर सोइये.. लेकिन वो थकावट और एक रात जागने के कारण बिना खाये ही सो गया था। उसे अच्छे से याद था कि वो अपनी हवेली में ही सोया था फिर उसे यहाँ इस भयानक जगह पर कौन ले आया?
अभी वो इस उधेड़बुन में ही लगा था कि तभी उसे उस दूर जलती बुझती चिता में से एक साया निकलता हुआ दिखाई दिया, उस दृश्य को देखकर उसे इतनी गर्मी में भी अपना खून जमता हुआ महसूस हुआ... और उधर वो साया शनः शनः उसके नजदीक आता जा रहा था।
कुछ ही देर में वो साया उसके इतने नज़दीक आ चुका था कि वो ये पहचान सकता था कि वो किसी औरत का साया है और कुछ ही पल में वो साया उसके सामने खड़ा था।
चांद के मद्धिम प्रकाश में उस औरत का चेहरा बहुत स्पष्ट तो नहीं हां इतना अवश्य दिख रहा था कि अच्छे से अच्छे मजबूत दिल वाले कि हृदयगति रुक जाए और उसका दिल तो इतना मज़बूत भी नहीं था कि वो इतना भयानक दृश्य देख पाता, इसीलिए उसे अपने सीने में एक चुभन सी महसूस हुई। सीने पर हाँथ रख वो लड़खड़ाती जुबान से सिर्फ इतना ही बोल पाया "क.. क.. कौन हो तुम ?? और मैं यहाँ पर कैसे आ गया ??? "
Details of Book :-
Particulars | Details (Size, Writer, Dialect, Pages) |
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Name of Book: | संभाला | Sambhala |
Author: | Anurag Agnihotri |
Total pages: | 84 |
Language: | हिंदी | Hindi |
Size: | 2.5 ~ MB |
Download Status: | Available |

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