Free Hindi Book Saral Yog Se Ishwar Sakshatkar In Pdf Download
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पुस्तक का संक्षिप्त विवरण:
पाठकों की सेवा में 'सरल योग से ईश्वर साक्षात्कार नामक 'दयानन्द सन्देश का विशेषाङ्क प्रस्तुत करते हुए जहाँ हमें अत्यधिक हर्ष हो रहा है, वहाँ योग का यथार्थ स्वरूप और उसकी मानव जीवन में उपयोगिता समझ में आने से । योग विषयक भ्रान्तियों का निराकरण होने से) विद्या का प्रकाश और अविद्या का नाश करना भी इसका मुख्य उद्देश्य है। महर्षि दयानन्द ने इस प्राचीन आर्ष ज्ञान को, जो प्रायः लुप्त ही हो गया था, अनेक वर्षों तक दुर्गम, बीहड़ जंगलों व पर्वतों की गुफाओं में बैठे योगियों व योग-साधकों के सान्निध्य में रहकर सीखा और लुप्त विद्या को पुनर्जीवित किया। एतदर्थ प्राणिमात्र के परम हितैषी महर्षि का हम हृदय से आभार व्यक्त करते हैं और उन्हें भूयो भूयः प्रणाम् करते हैं और उसी योग-विद्या को जीवनभर की कठोर साधना एवं स्वाध्याय के द्वारा पल्लवित, पुष्पित और फलित करनेवाले श्री स्वामी सत्यपति जी का भी हार्दिक अभिनन्दन करते हैं कि जो सतत् भौतिक चकाचौंध की प्रबल बाधा को दूर करके योग-विद्या के प्रचार व प्रसार में ही अहर्निश लगे हुए है।
योग का महत्व वैदिक साहित्य में दर्शनों का विशेष स्थान है और छह दर्शनों में भी योगदर्शन का उपयोगिता के कारण विशिष्ट स्थान है। यदि यह भी कहा जाए कि योग के बिना लौकिक जीवन में भी उन्नति नहीं होती तो भी कोई अतिशयोक्ति नहीं है। अधिकतर लोग योग से इसलिए विमुख रहते हैं कि यह तो विरक्त व संन्यस्त लोगों का ही विषय है, सांसारिक लोगों को इससे क्या लेना-देना। यह तो वृद्धावस्था में संसार से विमुख लोगों के चिन्तन का विषय है, गृहस्थी, युवक व बच्चों को योग की क्या आवश्यकता है ? किन्तु ऐसा सोचना योग को सर्वथा न समझने के कारण है। योग तो ऐसी संजीवनी विद्या है कि इसके बिना सांसारिक जीवन और संसार के भोग भी निरर्थक हैं। योग क्या है? इसको समझाते हुए महाभारत में महर्षि व्यास लिखते है -
युक्ताहारविहारस्य मुक्तचेष्टस्य कर्मसु।
युक्तस्वप्नावबोधस्य योगो भवति दुःखहा ।।
मोगस्यः कुरु कर्माणि सङ्ग त्यक्त्वा धनञ्जयः ।
सिद्धघसिद्धयोः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते ।।
हे अर्जुन ! जिस व्यक्ति का आहार-विहार ठीक नहीं है, जिस व्यक्ति की सांसारिक कामों के करने की निश्चित दिनचर्या नहीं है, और जिस व्यक्ति की सोने जागने की दिनचर्या निश्थित नहीं है, ऐसा व्यक्ति यदि योग करने सरल योग से ईश्वर साक्षात्कार.......
Details of Book :-
Particulars | Details (Size, Writer, Dialect, Pages) |
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Name of Book: | सरल योग से ईश्वर साक्षातकार | Saral Yog Se Ishwar Sakshatkar |
Author: | Swami Satyapati Parivrajak |
Total pages: | 116 |
Language: | हिंदी | Hindi |
Size: | 46 ~ MB |
Download Status: | Available |

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