Free Hindi Book Savarkar In Pdf Download
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पुस्तक का संक्षिप्त विवरण:
वर्ष 2004 की बात है। सुदूर पोर्ट ब्लेयर में उठे एक विवाद से भारत के समाचार पत्र और टेलिविजन चैनल अटे पड़े थे। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में उस समय से ठीक पहले की भारत सरकार ने पोर्ट ब्लेयर की कुख्यात सेल्युलर जेल में सज़ा काट चुके एक स्वतंत्रता सेनानी की याद में, उनके नाम और उद्धरण वाली पट्टिका स्थापित की थी। इस स्मारक को इंडियन ऑयल फाउंडेशन ने स्थापित किया था।
सरकारी और मीडिया हलकों में यह खुला रहस्य था कि दिवंगत आत्मा को देर से मिली पहचान तत्कालीन वाजपेयी मंत्रिमंडल के पेट्रोलियम मंत्री राम नाइक के अथक प्रयासों से संभव हुई है। लेकिन 2004 के आम चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) की अगुवाई में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) ने वाजपेयी सरकार को पराजित कर दिया। सत्ता में आने के कुछ ही समय बाद, तेज रफ्तार कार्रवाई के तहत, नई सरकार और उसके पेट्रोलियम मंत्री मणिशंकर अय्यर ने वह पट्टिका वहाँ से हटवा दी। साथ ही उस स्वतंत्रता सेनानी के संबंध में कई आपत्तिजनक वक्तव्यों के साथ अय्यर ने पट्टिका हटाए जाने को उचित भी ठहराया। इसके बाद संसद के दोनों सदनों में खूब हंगामा मचा और पूर्व सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी और महाराष्ट्र की उसकी सहयोगी शिवसेना ने पट्टिका को पुनः स्थापित करने और मंत्री द्वारा माफी मांगे जाने की मांग रखी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और विपक्ष को स्पष्ट शब्दों में कह दिया गया कि यूपीए सरकार की ऐसी कोई मंशा नहीं है।
अनुचित विवाद में फँसे स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर में पहली बार उसी समय मेरी रुचि जगी थी। बेशक मैंने पहले उनका नाम सुन रखा था, हालाँकि यह नाम स्कूलों में हमारी इतिहास की पाठ्यपुस्तकों से नदारद रहता था। सीबीएसई (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) पाठ्यक्रमों से शिक्षा प्राप्त करने के बाद, मुझे महसूस हुआ कि भारत की परवर्ती केंद्र सरकारें चाहती ही ही नहीं थीं कि भारत का युवावर्ग इस व्यक्ति के बारे में जान पाए।
जैसे आदम और हव्वा के जमाने से वर्जित फल हमेशा से कौतूहल का विषय रहा है, उसी तरह अगले कुछ वर्षों तक मेरे जिज्ञासु मस्तिष्क में सावरकर ही केंद्रीय विषय बने रहे। इसी तरह भारत की विभक्त राजनीति में उठने वाले प्रत्येक मौजूदा विवाद में उनका नाम घसीटे जाने पर भी मैं सचेत था। प्रश्न यह था कि 1966 में दिवंगत कोई व्यक्ति मौजूदा पीढ़ी में इतनी मजबूत उत्कंठा कैसे उभार रहा था? इस पर मैं हैरान था। और इसके बाद आरंभहुई सावरकर की जीवनयात्रा की मेरी खोज, जिन्हें नित नए रूप में मलिन किया जाता था।
Details of Book :-
Particulars | Details (Size, Writer, Dialect, Pages) |
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Name of Book: | सावरकर | Savarkar |
Author: | Vikram Sampath |
Total pages: | 506 |
Language: | हिंदी | Hindi |
Size: | 8 ~ MB |
Download Status: | Available |

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