Free Hindi Book Shri Roop Bhavani Rahshyopadesh In Pdf Download
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पुस्तक का संक्षिप्त विवरण:
विक्रमाब्द १६६० (ईस्वी १६३४) दुर्गा अष्टमी को श्री अलख-साहिबा ट्रस्ट अस्तित्त्व में आया। यहाँ पर यह बताना आवश्यक है कि ट्रस्ट किन परिस्थितियों के कारण बनाया गया। श्री अलख ऐश्वर्य (जगत माता भवानी) के निर्वाण के उपलक्ष में दो वार्षिक श्राद्ध सम्पन्न होते हैं। एक माघ कृष्ण-पक्ष सप्तमी को बेंदमर (विद्दामठ) नवाकदल, श्रीनगर में दूसरा कन्यार्कगत' के पितृपक्ष, अश्विन कृष्ण सप्तमी को वासुकि कुण्ड (वासकूरा, सुम्बल तहसील, गान्धरवल (कश्मीर) में। बिरादरी द्वारा प्रस्तावित व्यक्ति इस यज्ञ को यथेच्छा अपनी विरादरी में सम्पन्न करता था और इस यज्ञ को करने वाले प्रस्तावित व्यक्ति को यश आदि के खर्चे की पूति के लिए यज्ञ में चढ़ाई गई नकदी दी जाती थी, जिसको "जरि नियाज" कहते थे। यज्ञ आदि के खर्चे के उपरान्त बचे हुए रुपये को भवानी की तपस्या से सम्बन्धित 'अस्थापनों' के सुधार एवं उनकी मरम्मत के निमित्त व्यय किया जाता था। विक्रमाब्द (१६८०) में बिरादरी ने धनाभाव से विवश होकर जनता से चन्दा जमा किया और "वासुकि कुण्ड" (वासकूरा) में एक धर्मशाला का निर्माण करके जनता की आवश्यकताओं को पूरा किया। वासकूरा में प्राचीन धर्मशाला थी, जिसमें कन्यार्कगत (पितृ-पक्ष) का श्राद्ध किया जाता था किन्तु वह आग से जल गई थी। बिरादरी के सामने इसके निर्माण की समस्या थी, जिससे श्राद्ध का अनुष्ठान यथावत् हुआ करे। अतः इस पुनीत कार्य के लिए यथा-योग्य जगह या मकान का होना अनिवार्य बन गया था। यही कारण था कि बिरादरी ने धर्मशाला बनाने का प्रण किया। श्रद्धालुओं और इस कार्य से सम्बन्धित अन्य व्यक्तियों ने एक सभा के गठन का निर्णय लिया और "श्री अलख साहिबा ट्रस्ट" का अस्तित्व निम्नलिखित उद्देश्यों एवं सिद्धान्तों.........
Details of Book :-
Particulars | Details (Size, Writer, Dialect, Pages) |
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Name of Book: | श्री रूप भवानी रहस्योपदेश | Shri Roop Bhavani Rahshyopadesh |
Author: | Dr. Trilokinath Ganju |
Total pages: | 259 |
Language: | हिंदी | Hindi |
Size: | 150 ~ MB |
Download Status: | Available |

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