ताजक विज्ञान | TAJAK VIGYAN HINDI JYOTISH BOOK PDF DOWNLOAD

Tajak Vigyan Hindi Pdf Download

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पुस्तक का संक्षिप्त विवरण:

बादशाह के राज ज्यौतिषी थे। अन्यान्य विद्वान् भी यवन-साम्राज्य में राज-ज्यौतिषी पदों पर प्रतिष्ठित थे।

ताजक में ग्रह का बल आँकने के लिए षड्बल की पद्धति है। ताजक. में ग्रह का बल आँकने के लिए बृहत् पंचवर्गी तथा द्वादशवर्गी है। इनकी रचना की आधारशिलाएँ षड्वर्ग तथा द्वादशवर्ग हैं। उक्त वर्ग जातक की तो विशेष निधि हैं। जातक में लगभग ४२ प्रकार की दशाएँ हैं, ताजक में भी विभिन्न प्रकार की दशाएँ हैं। ताजक में सहम है। सहम का अर्थ भाग या हिस्सा है। भाव के विचार में तो सहम अत्युपयोगी है।. सहम का सहयोग लिये बिना भाव के विचार में पूर्णता नहीं आ सकती । वर्ष के अतिरिक्त सहम का विचार प्रश्न में भी अत्युपयोगी है। उदाहरणार्थ जैसे किसी विद्यार्थी ने वर्षपत्रिका बनवाकर परीक्षा के संबंध में जिज्ञासा की। इस संबंध में वर्षपत्रिका के पंचम भाव का विचार करना होगा; क्योंकि विद्या का स्थान पंचम भाव है। इसके अतिरिक्त विद्यासहम का भी विचार करना होगा। बुद्धिसहम का भी विचार करना होगा; क्योंकि बुद्धि ठीक न होने से मस्तिष्क में विषय अंकित नहीं हो पाता है। इनके साथ परीक्षार्थी के लिए स्फूर्तिसहम का भी विचार करना अत्यावश्यक है। कारण कि परीक्षार्थी में बुद्धि भी है, विद्या भी है किन्तु परीक्षा के समय प्रश्नपत्र के हल करने में स्फूर्ति नहीं है तो विद्या और बुद्धि व्यर्थ जैसी हो जाती है। अतएव वर्षपत्रिका का पंचम भाव, विद्यासहम, बुद्धिसहम, स्फूर्तिसहम, इन सभी का विचार करके परीक्षा संबंधी परिणाम निकालना होगा, तभी वह तथ्य भी उतरेगा। यही विचार को रीति प्रश्न में भी लागू है।

ताजक सर्वथा जातक पर आधारित है, अतः उसकी प्रामाणिकता में कोई संदेह करने का लेशमात्र भी अवसर नहीं है। हाँ, यह अवश्य है कि ताजक. की प्रक्रिया और विचार पद्धति में नवीनता और विलक्षणता है। वर्षतंत्र ग्रन्थ में वर्षफल के प्रयोजन में वर्णन है-

जातकोदितदशाफलं हि यत् स्थूलकालफलदं स्फुटं नृणाम् । तन्त्र न स्फुरति दैवविन्मतिस्तद् ब्रुवेऽब्द‌फलमादि ताजकात् ।।

जातक (जन्मकाल) संबंधी दशा, लम्बे समय की होती है, अतः उसका फल भी लम्बे समय का होता है। लम्बे समय के विचार में दैवज्ञ (ज्यौतिषी) की बुद्धि का स्फुरण नहीं हो पाता। ताजक की दशा सूक्ष्म काल (केवल एक वर्ष) की होने से उसमें दैवज्ञ की मति स्फुरित होती है। 

Details of Book :-

Particulars

Details (Size, Writer, Dialect, Pages)

Name of Book:ताजक विज्ञान | Tajak Vigyan
Author:Sri Sudarshanacharya Shastri
Total pages:448
Language: हिंदी | Hindi
Size:171 ~ MB
Download Status:Available


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